Monday, 31 March 2014
Monday, 24 March 2014
शब्द
शब्द है ब्रह्म
सभी अर्थों से परे,
शब्दों को देते हम अर्थ
अनुसार अपने विचारों के,
शब्द है आईना
हमारे व्यक्तित्व व भावों का.
शब्द देते जीवन
शब्द देते प्रेरणा
किसी को जीने की,
शब्द बन जाते
कभी तीक्ष्ण कटार
और देते घाव
जो भरता नहीं कभी.
कसो शब्दों को
अंतस की कसौटी पर
अभिव्यक्ति से पहले,
मुंह से निकले शब्द
नहीं आते वापिस
चाहने पर भी.
....कैलाश शर्मा
सभी अर्थों से परे,
शब्दों को देते हम अर्थ
अनुसार अपने विचारों के,
शब्द है आईना
हमारे व्यक्तित्व व भावों का.
शब्द देते जीवन
शब्द देते प्रेरणा
किसी को जीने की,
शब्द बन जाते
कभी तीक्ष्ण कटार
और देते घाव
जो भरता नहीं कभी.
कसो शब्दों को
अंतस की कसौटी पर
अभिव्यक्ति से पहले,
मुंह से निकले शब्द
नहीं आते वापिस
चाहने पर भी.
....कैलाश शर्मा
Monday, 10 March 2014
जीवन और मृत्यु
क्यों करते हो
प्रेम या वितृष्णा
जीवन और मृत्यु से,
जियो जीवन सम्पूर्णता से
हो कर निस्पृह उपलब्धियों से,
रहो तैयार स्वागत को
जब भी दे दस्तक मृत्यु.
रखो अपने मन को मुक्त
भ्रम और संशय से,
पाओगे जीवन में
प्रारंभ निर्वाण का
और मृत्यु में अनुभव
मुक्ति पुनर्जन्म से.
....कैलाश शर्मा
Monday, 24 February 2014
खुशियों का सागर
तलाश में खुशियों की
करते संघर्ष जीवन पर्यंत
और कर लेते एकत्र
दुखों का ढेर जीवन में.
लेकिन की जब तलाश
खुशियों की अंतर्मन में,
पाया विशाल सागर
अनंत खुशियों का
जिससे था अनभिज्ञ
साथ रह कर भी.
...कैलाश शर्मा
करते संघर्ष जीवन पर्यंत
और कर लेते एकत्र
दुखों का ढेर जीवन में.
लेकिन की जब तलाश
खुशियों की अंतर्मन में,
पाया विशाल सागर
अनंत खुशियों का
जिससे था अनभिज्ञ
साथ रह कर भी.
...कैलाश शर्मा
Monday, 17 February 2014
संतुष्टि
असंयमित मन
उठा देता सुनामी
जीवन में,
उत्तंग लहरें
असीमित इच्छाओं की
बहा ले जातीं साथ
सुख और शांति,
छोड़ जातीं महाविनाश
असंतुष्टि का.
कितना कठिन
सामना सुनामी का,
केवल दीवार
संतुष्टि और विवेक की
रोक पाती लहरें
मन के सुनामी की.
....कैलाश शर्मा
उठा देता सुनामी
जीवन में,
उत्तंग लहरें
असीमित इच्छाओं की
बहा ले जातीं साथ
सुख और शांति,
छोड़ जातीं महाविनाश
असंतुष्टि का.
कितना कठिन
सामना सुनामी का,
केवल दीवार
संतुष्टि और विवेक की
रोक पाती लहरें
मन के सुनामी की.
....कैलाश शर्मा
Sunday, 9 February 2014
भाग्य
होता है निर्भर
अस्तित्व और उपलब्धि
हमारी तीव्र इच्छा पर,
जैसी होती है इच्छा
तदनुसार होते प्रयास
उपलब्धि को वैसे ही कर्म.
जैसे होते हैं कर्म
बन जाता भाग्य वैसा ही.
....कैलाश शर्मा
अस्तित्व और उपलब्धि
हमारी तीव्र इच्छा पर,
जैसी होती है इच्छा
तदनुसार होते प्रयास
उपलब्धि को वैसे ही कर्म.
जैसे होते हैं कर्म
बन जाता भाग्य वैसा ही.
....कैलाश शर्मा
Saturday, 1 February 2014
खुशियाँ
जीवन का
उद्देश्य
प्राप्ति असीम सुख की,
दौड़ते रहते उसके पीछे।
बदल जाती परिभाषा सुख की
व्यक्ति व परिस्थिति अनुसार
लेकिन बदलता नहीं लक्ष्य।
प्राप्ति असीम सुख की,
दौड़ते रहते उसके पीछे।
बदल जाती परिभाषा सुख की
व्यक्ति व परिस्थिति अनुसार
लेकिन बदलता नहीं लक्ष्य।
होता है
मष्तिष्क बचपन में
पवित्र एवं इक्षुक सीखने का,
शीशे का एक रंगीन टुकड़ा
और एक बहुमूल्य हीरा
देता है समान ख़ुशी.
पवित्र एवं इक्षुक सीखने का,
शीशे का एक रंगीन टुकड़ा
और एक बहुमूल्य हीरा
देता है समान ख़ुशी.
जैसे
जैसे होता विस्तार
मष्तिस्क और अनुभवों का,
बढ़ती जाती इच्छायें
ऊंचे होते जाते लक्ष्य
बढ़ती जाती गांठें कुंठाओं की,
दूर होते जाते खुशियों से।
मष्तिस्क और अनुभवों का,
बढ़ती जाती इच्छायें
ऊंचे होते जाते लक्ष्य
बढ़ती जाती गांठें कुंठाओं की,
दूर होते जाते खुशियों से।
स्थिर
करो मन एक लक्ष्य पर
शून्य हो जायें सीमायें समय की,
विलीन हो जायेंगी चिंतायें
जब मुक्त हो जाओगे
खोने या पाने के भय से।
विलीन हो जायेंगी चिंतायें
जब मुक्त हो जाओगे
खोने या पाने के भय से।
....कैलाश
शर्मा
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