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Tuesday, 3 March 2015

जीवन

नहीं कोई अर्थ 
स्वयं में जीवन का,
देना होता अर्थ 
स्वयं ही जीवन को.

जीवन वह नहीं जो मिलता है 
जीवन वह है जो हम बनाते हैं.

जो भी आरोपित करते अर्थ 
वही रूप ले लेता जीवन.
रहना जाग्रत ही अर्थ जीवन का.

....कैलाश शर्मा 

Tuesday, 12 August 2014

तलाश सम्पूर्ण की

टुकड़े टुकड़े संचित करते जीवन में
भूल जाते अस्तित्व सम्पूर्ण का,
देखते केवल एक अंश जीवन का
मान लेते उसको ही सम्पूर्ण सत्य
वही बन जाता हमारा
स्वभाव, प्रकृति, अहम् और ‘मैं’.

नहीं होता परिचय सम्पूर्ण से
केवल बचपने प्रयासों द्वारा,
जगानी होती बाल सुलभ उत्सुकता,
बचपना है एक अज्ञानता
एक भय नवीनता से,
बचपन है उत्सुकता और मासूमियत
जिज्ञासा जानने की प्रति पल
जो कुछ आता नवीन राह में,
नहीं ग्रसित पूर्वाग्रहों 
पसंद नापसंद, भय व विचारों से,
देखता हर पल व वस्तु में
आनंद का असीम स्रोत.

जैसे जैसे बढ़ते आगे जीवन में
अहंकार जनित ‘मैं’,
घटनाएँ, विचार और अर्जित ज्ञान
आवृत कर देता मासूमियत बचपन की,
देखने लगते वर्तमान को
भूतकाल के दर्पण में,
भूल जाते अनुभव करना 
प्रत्यक्ष को बचपन की दृष्टि से.

जीवन एक गहन रहस्य
अपरिचित दुरूह राहें
अनिश्चित व अज्ञात गंतव्य,  
बचपन की दृष्टि 
है केवल संवेदनशीलता
अनभिज्ञ भावनाओं
व ‘मैं’ के मायाजाल से
जो करा सकती परिचय
हमारे अस्तित्व के
सम्पूर्ण सत्य से.


....कैलाश शर्मा 

Friday, 27 June 2014

जीवन

जीवन सतत संघर्ष
कभी अपने से
कभी अपनों से
और कभी परिस्थितियों से,
एक नदी की तरह
जो टकराती राह में
कठोर चट्टानों से
और बढ़ती जाती
लेकर साथ दोनों किनारों को 
अविचल आगे राह में
अपनी मंज़िल सागर की ओर.

आने पर मंजिल
खो देती अपना अस्तित्व
विशाल सागर में,
छोड़ देते साथ किनारे
लेकर सदैव साथ जिनको
की थी यात्रा मंजिल तक.

नहीं है रुकता समय
किसी के चाहने पर,
नहीं होती पूरी सब इच्छायें
कभी किसी जन की,
असंतुष्टि जनित आक्रोश
कर देता अस्थिर मन
और भूल जाते हम
उद्देश्य अपने जन्म का.


...कैलाश शर्मा 

Wednesday, 28 May 2014

जीवन और उपलब्धि

पैदा करो विश्वास 
स्वयं की शक्ति पर,
छुपी है तुम्हारे अन्दर 
चिंगारियां
अनंत संभावनाओं की,
प्रज्वलित करो उन्हें 
अपने विश्वास की 
हवा से.

ढालो अपने आप को 
ऐसे सांचे में 
गर्व हो जिस पर 
तुम्हें अपने जीवन 
व उसकी उपलब्धि पर.

....कैलाश शर्मा 

Monday, 10 March 2014

जीवन और मृत्यु

क्यों करते हो
प्रेम या वितृष्णा  
जीवन और मृत्यु से,
जियो जीवन सम्पूर्णता से 
हो कर निस्पृह उपलब्धियों से,
रहो तैयार स्वागत को
जब भी दे दस्तक मृत्यु.

रखो अपने मन को मुक्त 
भ्रम और संशय से,
पाओगे जीवन में 
प्रारंभ निर्वाण का 
और मृत्यु में अनुभव 
मुक्ति पुनर्जन्म से.

....कैलाश शर्मा 

Monday, 24 February 2014

खुशियों का सागर

तलाश में खुशियों की 
करते संघर्ष जीवन पर्यंत 
और कर लेते एकत्र 
दुखों का ढेर जीवन में.

लेकिन की जब तलाश 
खुशियों की अंतर्मन में, 
पाया विशाल सागर 
अनंत खुशियों का 
जिससे था अनभिज्ञ  
साथ रह कर भी.

...कैलाश शर्मा