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Wednesday, 10 June 2015
Friday, 20 June 2014
अनवरत यात्रा
सुनिश्चित है जग में
केवल जन्म और मृत्यु
पर कर देते विस्मृत
आदि और अंत को,
समझने लगते शाश्वत
केवल अंतराल को.
जब आता समय
पुनः बदलने का निवास,
सब भौतिक उपलब्धियां
और सम्बन्ध
रह जाते पुराने घर में,
होती यात्रा पुनः प्रारंभ
कर्मों के बोझ के साथ
जहाँ से हुई थी शुरू.
Monday, 10 March 2014
जीवन और मृत्यु
क्यों करते हो
प्रेम या वितृष्णा
जीवन और मृत्यु से,
जियो जीवन सम्पूर्णता से
हो कर निस्पृह उपलब्धियों से,
रहो तैयार स्वागत को
जब भी दे दस्तक मृत्यु.
रखो अपने मन को मुक्त
भ्रम और संशय से,
पाओगे जीवन में
प्रारंभ निर्वाण का
और मृत्यु में अनुभव
मुक्ति पुनर्जन्म से.
....कैलाश शर्मा
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