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Thursday, 5 March 2015

अब न चढ़े कोई भी रंग सखी री

अब न चढ़े कोई भी रंग सखी री।  
अपने रंग रंगी कान्हा ने, चढ़े न दूजो रंग  सखी री।       
तन का रंग तो छुट भी जाये, मन का रंग न धुले सखी री।      
अब तो श्याम रंग ही भावे, श्याम रंग मैं रंगी सखी री।    
कोई जतन नजर न आवे, कैसे छूटे यह रंग सखी री।     
क्यों खेलन को आयी होली, कैसे घर मैं जाऊँ सखी री। 
अब तो श्याम चरण बस जाऊँ, दीखे न कोई ठांव सखी री।

**होली की हार्दिक शुभकामनाएं**

...कैलाश शर्मा 

Tuesday, 10 February 2015

चुनरी रंग गयी तेरे रंग में

चुनरी रंग गयी तेरे रंग में।
श्याम रंग में जब रंग लीनी, रंगे न दूजे रंग में। 
प्यार में तेरे जोगन हो गयी, नाचूँ तेरे संग में।      
बंसी मुझे बना लो कान्हा, रहूँ अधर के संग में।    
पागल हो कर प्रेम में तेरे, भूल गयी रंग ढंग में।    
ये जग मुझको रास न आवे, बिन तेरे बेरंग मैं।
....कैलाश शर्मा