चुनरी रंग गयी तेरे रंग में।
श्याम रंग में जब
रंग लीनी, रंगे न दूजे रंग में।
प्यार में तेरे जोगन
हो गयी, नाचूँ तेरे संग में।
बंसी मुझे बना लो
कान्हा, रहूँ अधर के संग में।
पागल हो कर प्रेम
में तेरे, भूल गयी रंग ढंग में।
ये जग मुझको रास
न आवे, बिन तेरे बेरंग मैं।
....कैलाश शर्मा