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Tuesday, 10 February 2015

चुनरी रंग गयी तेरे रंग में

चुनरी रंग गयी तेरे रंग में।
श्याम रंग में जब रंग लीनी, रंगे न दूजे रंग में। 
प्यार में तेरे जोगन हो गयी, नाचूँ तेरे संग में।      
बंसी मुझे बना लो कान्हा, रहूँ अधर के संग में।    
पागल हो कर प्रेम में तेरे, भूल गयी रंग ढंग में।    
ये जग मुझको रास न आवे, बिन तेरे बेरंग मैं।
....कैलाश शर्मा            

Thursday, 18 September 2014

मनवा न लागत है तुम बिन

मनवा न लागत है तुम बिन.
जब से श्याम गए हो ब्रज से, तड़पत है हिय निस दिन. 
सूना लागत बंसीवट का तट, न लागत मन तुम बिन.  
पीत कपोल भये हैं कारे, अश्रु बहें नयनन से निस दिन.   
अटके प्रान गले में अब तक, आस दरस की निस दिन.      
वृंदा सूख गयी है वन में, यमुना तट उदास है तुम बिन.      
आ जाओ अब तो तुम कान्हा, प्यासा मन है तुम बिन.

...कैलाश शर्मा