Friday, 24 January 2014

अकेलापन नहीं पर्याय एकांत का

अकेलापन नहीं पर्याय एकांत का, 
उदासी का कुहासा 
दर्द बीते हुए पलों के 
चुभते यादों के दंश 
चिंता कल के सपनों की 
कब रहने देते अकेले 
अकेलेपन को.

एकांत,
स्तिथि परम आनंद की 
नहीं उदासी अकेलेपन की,
होता वार्तालाप स्व-आत्म से 
अनुभूति शांति और संतुष्टि की,
समाहित विश्व जब अंतस में 
नहीं होता कभी अनुभव 
अकेलापन एकांत में.

.....कैलाश शर्मा 

Tuesday, 21 January 2014

आत्म-ज्ञान

विस्मृत कर दो अहम् को 
जाग्रत करो आकांक्षा 
उसे पाने की,
कब है वह दूर तुमसे 
झांको तो सही
अपने अंतस में.

धूमिल हो जाता प्रकाश 
जग का व नभ का,
फीकी पड़ जाती 
रोशनी भी सूरज की,
हो जाता आलोकित जब 
प्रकाश स्व अंतस में.

....कैलाश शर्मा 

Saturday, 18 January 2014

स्वप्न

देखते जब स्वप्न
केवल अपने लिये
रह जाता बनके 
केवल एक स्वप्न।

मिल कर साथ
देखते जो स्वप्न 
सब के लिये,
उतर आता वह 
बन कर 
एक सम्पूर्ण सत्य।

देखो एक स्वप्न
लेकर सब को साथ।

....कैलाश शर्मा

Friday, 23 March 2012

वन्दना

शक्ति देना, प्रभु मुझे तुम शक्ति देना.

ज्ञान का सागर गहन गंभीर है,
पार करना कठिन, क्षुद्र नौका के सहारे.
आयेंगे अज्ञान के तूफ़ान गहरे,
रास्ते बन जायें लहरें, प्रेम के तेरे सहारे.

है बहुत कमजोर यह पतवार मेरी,
शक्ति देना, प्रभु मुझे तुम शक्ति देना.

भक्ति तेरी ही असीमित शक्ति है,
चल पड़ा हूँ आज मैं इसके सहारे.
राह के कंटक बनेंगे फूल मुझको,
यह रहे विश्वास, छूटें न किनारे.

डगमगाये न कभी विश्वास तुम पर, 
शक्ति देना, प्रभु मुझे तुम शक्ति देना.

तन को कब समझा था अपना,
मन समर्पित आज तुमको कर दिया है.
कैसे भव सागर करूँगा पार प्रभु,
बोझ यह भी आज तुम को दे दिया है.

मन रहे पावन तुम्हारे मिलन पर,
शक्ति देना, प्रभु मुझे तुम शक्ति देना.

कैलाश शर्मा