पाने को अपनी मंज़िल
चलना होता है स्वयं
अपने ही पैरों पर,
दे सकते हैं साथ
केवल कुछ दूरी तक
क़दम दूसरों के.
जुटानी होती है सामर्थ
करना होता है विश्वास
अपने पैरों पर,
नहीं रुकता कारवां
देने को साथ
थके क़दमों का,
ढूँढनी होती है स्वयं
अपनी राह और मंज़िल
और बढाने होते हैं क़दम
स्वयं मंज़िल की ओर.
....कैलाश शर्मा
चलना होता है स्वयं
अपने ही पैरों पर,
दे सकते हैं साथ
केवल कुछ दूरी तक
क़दम दूसरों के.
जुटानी होती है सामर्थ
करना होता है विश्वास
अपने पैरों पर,
नहीं रुकता कारवां
देने को साथ
थके क़दमों का,
ढूँढनी होती है स्वयं
अपनी राह और मंज़िल
और बढाने होते हैं क़दम
स्वयं मंज़िल की ओर.
....कैलाश शर्मा
