Thursday, 3 April 2014

वर्तमान

हर आती सांस 
देती एक ऊर्जा व शांति 
तन और मन को, 
जब निकलती है सांस 
दे जाती मुस्कान अधरों को.

हर श्वास का आना जाना ही 
है एक सम्पूर्ण शाश्वत पल,
जियो इस पल को 
विस्मृत कर भूत व भविष्य.

....कैलाश शर्मा 

13 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (04.04.2014) को "मिथकों में प्रकृति और पृथ्वी" (चर्चा अंक-1572)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. बहुत खूबसूरत बात
    पर ये साँस भी कहाँ
    रह पाती है कभी याद :)

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  3. वाह ! बहुत खूब !

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  4. बहुत सुन्दर शब्दों का चयन और संयोजन कर एक बेहतरीन सन्देश परक प्रस्तुति
    जो मार्गदर्शन करा रही है, जोश-जज़्बा जगा रही है और ज़िन्दगी को सार्थकता प्रदान करने को कह रही है।
    बहुत खूब

    एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ: ''भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करना''

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  5. हर श्वास का आना जाना ही
    है एक सम्पूर्ण शाश्वत पल bahut khub.

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  6. सही है। ऐसा ही है कुछ अध्‍यात्‍म में सोचना।

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  7. यही है शाश्वत सत्य, वर्तमान ही शाश्वत रहता है .. बहुत बढ़िया!

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  8. ठीक ही तो है -जिस पर हमारा वश है, उस वर्तमान को ठीक से जी लें तो भविष्य अपनी चिंता ख़ुद कर लेगा .

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  9. सुन्दर और अर्थपूर्ण...यही शाश्वत सत्य है...एक साँस आए, एक साँस जाए...यही जीवन कहलाए..

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  10. बहुत सुंदर एवं शाश्वत.भाव किए अर्थपूर्ण..

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